वाक्य की परिभाषा, अर्थ, प्रकार, उदाहरण जानें | वाक्य किसे कहते हैं व इसके कितने भेद होते हैं? | Vakya explained in Hindi [Vakya kise kahte hain?]

वाक्य की परिभाषा, अर्थ, प्रकार, उदाहरण जानें | वाक्य किसे कहते हैं व इसके कितने भेद होते हैं? | Vakya explained in Hindi [Vakya kise kahte hain?].

भाषा का मुख्य कार्य वक्ता के विचारों की अभिव्यक्ति है अर्थात वक्ता अपने भावों को भाषा के माध्यम से ही प्रकट करता है। वाक्य के अभाव में भाव या विचार की स्थिति में संदिग्ध हो जाती है। क्योंकि मन में जो भाव उत्पन्न होते हैं ,वे वाक्य के रूप में ही होते हैं। भले ही एक छोटा बालक ‘रोटी’ या ‘दूध’ कहकर रोटी या दूध देने का आग्रह करता है, परंतु उसके यह शब्द भी वाक्य रूप में होते हैं ,अर्थात उसके मन में उत्पन्न विचार होता है ‘मुझे रोटी दो’ या ‘मुझे दूध दो’ इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि मनुष्य वाक्य के माध्यम से ही सोचता है और अपने भावों को प्रकट करता है।

वाक्य की परिभाषा – वाक्य किसे कहते हैं?

भारतीय विद्यानो  का मत:

  • ‘महाभाष्य’ के रचनाकार पतंजलि के अनुसार, “जहां क्रिया, अव्यय, कारक तथा विशेषण पद एकत्र हो, उसे वाक्य कहते हैं।”
  • डॉ. भोलानाथ तिवारी के अनुसार, “वाक्य भाषा की सहज इकाई है ,जिसमें एक या अधिक शब्द हो, जो अर्थ की दृष्टि से पूर्ण हो या अपूर्ण हो परंतु व्याकरण की दृष्टि से अपने विशिष्ट संदर्भ में अवश्य पूर्ण होती है ,साथ ही परोक्ष रूप से कम- से -कम एक क्रिया का भाव अवश्य होता है।”

अतः वाक्य से अभिप्राय है- भाषा की वह मुख्य सहज इकाई जिसके द्वारा किसी भाव को पूर्ण रूप से व्यक्त किया जा सकता है और जिसमें कम से कम एक समापिका क्रिया अवश्य रहती है

अथवा

अत: है दो या दो से अधिक शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं।

वाक्य के अनिवार्य तत्व

– वाक्य के निम्नलिखित 5 अनिवार्य तत्व है-

1. सार्थकता- वाक्य का मूल उद्देश्य है- पूर्ण और सार्थक अभिव्यक्ति। यहां वाक्य की सार्थकता से तात्पर्य है- वाक्य में प्रयुक्त सभी पदों और शब्दों का सार्थक रूप में प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए–

गाय को गौ माता कहते हैं।     (पदों के शब्दों का सार्थक प्रयोग)

माता को गौ माता कहते हैं।      (पदों का निरर्थक प्रयोग)

यगा को गौ तामा तेहक है।      ( निरर्थक ध्वनियों का प्रयोग)

2 .योग्यता- वाक्य के संदर्भ में योग्यता से आशय है कि पदों की आपस में संगति बैठे और शब्दों या पदों में प्रसंगानुकूल भावों का बोल कराने की क्षमता हो ।उदाहरण के लिए–

“वह पेड़ को आग से सीचता है।”

इस वाक्य में भले ही सार्थक शब्दों का प्रयोग हुआ है ,परंतु पेड़ को आग से नहीं बल्कि पानी से सींचा जाता है ।अतः पदों का यह समूह योग्यता के अभाव में वाक्य नहीं कहलाएगा।

3. आकांक्षा– वाक्य में इतनी शक्ति होनी चाहिए कि वह श्रोता की जानने की आकांक्षा या इच्छा को पूरा कर दें ।अर्थात पूरा वाक्य सुनने के बाद उसे कुछ और जानने की आकांक्षा ना रहे। उदाहरण के लिए-

“मैं अपनी के घर गई”  वाक्य को सुनने के बाद ही श्रोता के मन में कुछ और जाने की आकांक्षा रह जाती है जबकि “मैं अपनी सहेली के घर गई “वाक्य में उसकी यह आकांक्षा समाप्त हो जाती है। अतः पहले वाक्य वाले पद समूह को वाक्य नहीं कह सकते।

4. आसक्ति– आसक्ति अर्थ है -समीपता । मौखिक अभिव्यक्ति में वाक्य के सभी पद क्रमबद्ध व व्यवस्थित रूप में एक साथ प्रयुक्त होने चाहिए। ‘ सोहन वकील है ‘वाक्य पहले पद को आज, वकील शब्द को अगले दिन तथा ‘है ‘शब्द को तीसरे दिन में प्रयुक्त किया जाए तो उसे वाक्य नहीं कह सकते।

5.अन्विति- वाक्य में व्याकरण की दृष्टि से एकरूपता होनी चाहिए अर्थात वाक्य में प्रयुक्त विभिन्न पदों में वचन, लिंग, विभक्ति आदि की समानता हो ।उदाहरण के लिए–

  • मेरा घोड़ा चर रहे हैं।       (इन पदों में लिंग ,वचन आदि में एकरुपता का अभाव है।)
  • मेरा घोड़ा चर रहा है।       (इन पदों में अन्विति है अतः यह शुद्ध वाक्य है।)

वाक्य के अंग

वाक्य के 2 अंग होते हैं :

  1. उद्देश्य
  2. विधेय

(क) उद्देश्य

वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाए ,उसे उद्देश्य कहते हैं। उदाहरण के लिए-

‘राम रोटी खाता है,’ मैं ‘राम’ के बारे में बताया जा रहा है अतः यहां’ राम ‘उद्देश्य है।

(ख) विधेय

वाक्य में उद्देश्य के बारे में जो कुछ बताया गया है उसे विधायक कहते हैं उदाहरण के लिए-

‘राम ने रावण को मारा’-वाक्य में ‘रावण को मारा’ विधेय है। उद्देश्य की भांति विधेय का भी विस्तार हो सकता है।

वाक्य के प्रकार

(क) अर्थ की दृष्टि से वाक्य के प्रकार

वाक्य का प्रयोग किसी -ना -किसी उद्देश्य या प्रयोजन से होता है ।अभी हम आज्ञा दे कर कोई काम कर आते हैं, कभी प्रार्थना करते हैं ,कभी अपने मन की भावनाओं इच्छाओं को प्रकट करते हैं। इस प्रकार प्रत्येक वाक्य का एक निश्चित उद्देश्य होता है ।यह उद्देश्य पूरे वाक्य के मूल भाव अर्थात अर्थ को प्रस्तुत करता है ।इसी अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 वेद होते हैं जो कि निम्नलिखित हैं–

  1. विधानवाचक वाक्य
  2. निषेधवाचक वाक्य
  3. प्रश्नवाचक वाक्य
  4. आज्ञारथक वाक्य
  5. इच्छा वाचक वाक्य
  6. संदेह वाचक वाक्य
  7. विस्मयादिवाचक वाक्य
  8. संकेतवाचक वाक्य

१. विधानवाचक वाक्य:

जिस कथनात्मक वाक्य में किसी वस्तु ,स्थिति आदि के बारे में सकारात्मक व सामान्य बात कही जाती है, उसे विधानवाचक कहते हैं। ऐसे वाक्य में कहे गए कथन के सच या झूठ होने का पता लगाया जा सकता है। जैसे-

  • (अ) दीपावली हमेशा अमावस्या की रात में मनाई जाती है।
  • (आ) पंडित जवाहरलाल नेहरू हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री थे।

२. निषेधात्मक वाक्य:

जिस वाक्य में किसी कार्य की निषेध अथवा मना करने का भाव होता है, उसे निषेधात्मक वाक्य कहते हैं; जैसे-

  • (अ) मैं आज स्कूल नहीं जाऊंगा।
  • (आ) मैं तुम जैसे स्वार्थी मनुष्य से दोस्ती नहीं करूंगा।

३. प्रश्नवाचक वाक्य:

जिस वाक्य में किसी वस्तु, व्यक्ति आदि के बारे में कोई सूचना या जानकारी जानने के लिए प्रश्न पूछा जाता है उसे प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैं; जैसे-क्या मैं आपकी कोई सहायता कर सकता हूं?

४. आज्ञारथक वाक्य:

जिस वाक्य में किसी व्यक्ति को कुछ कार्य करने का आदेश दिया जाए ,वहां आज्ञारथक वाक्य होता है ।यहां ध्यातव्य है कि आज्ञारथक वाक्य केवल कुछ उच्च पद के लिए व्यक्ति द्वारा अपने अधीनस्थ या सामान्य व्यक्ति को आदेश देने के लिए प्रयोग किया जाता है; जैसे-

  •  (अ) मुझे एक गिलास पानी ला कर दो।       (मालिक नौकर से)
  • (आ) अपने हाथ ऊपर करके खड़े हो जाओ।    (अध्यापक छात्र से)

५. इच्छा वाचक वाक्य:

जिस वाक्य में किसी कामना ,इच्छा के पूरे होने का भाव प्रकट हो, उसे इच्छा वाचक वाक्य कहते हैं; जैसे–भगवान तुम्हें दीर्घायु प्रदान करें।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे।

६. संदेह वाचक वाक्य:

जिस वाक्य में किसी क्रिया के पूरे होने में संदेह प्रकट किया जाए ,उसे संदेह वाचक वाक्य कहते हैं ;जैसे–शायद आज कई दिनों बाद धूप निकले।

७. विस्मयादिवाचक वाक्य:

जिस वाक्य में मन के भाव आवेश; यथा- क्रोध, घृणा, शोक , विस्मय आदि प्रकट हो उसे विस्मयादिवाचक वाक्य कहते हैं ;जैसे

  • अ – वाह! कितनी सुंदर लड़की है।  (प्रसन्नता व विस्मय)
  • आ – हाय! मैं तो लुट गया। ‌‌।    (शोक)
  • इ – राम-राम! कितनी नीच हरकत की है।    (भत्रसना)
  • ई – छी छी !कैसी सडी मछली है।     (नफरत)

८. संकेतवाचक वाक्य:

जिस वाक्य में किसी कार्य के पूरा होने से पहले किसी शर्त की ओर संकेत किया जाए, उसे संकेतवाचक वाक्य कहते हैं ;जैसे

यदि आज वह करने लौटे तो पुलिस को सूचित कर देना।

(ख) रचना की दृष्टि से वाक्य के प्रकार-

रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते हैं-

  • १. सरल वाक्य  
  • २. संयुक्त वाक्य 
  • ३. मिश्र वाक्य

१. सरल वाक्य:

जिस वाक्य में एक -एक उद्देश्य और विधेय रहता है अथवा जिसमें एक कर्ता और एक क्रिया होती है, उसे सरल वाक्य कहते हैं। उदाहरण के लिए-

मैं घर जा रहा हूं।

सरल वाक्य में कभी-कभी कर्ता और क्रिया अप्रत्यक्ष भी होते हैं; जैसे-

सोहन, तुम कहां जा रहे हो?  (कर्ता की प्रत्यक्ष स्थिति)

अरे, तुम कहां चले?            (कर्ता कि अप्रत्यक्ष स्थिति)

परंतु सरल वाक्य में क्रिया या कर्ता कि अप्रत्यक्ष स्थिति केवल वार्तालाप या संवादों में ही होती है। सामान्य दशा में क्रिया व कर्ता का वाक्य में प्रत्यक्ष प्रयोग होता है। कभी-कभी सरल वाक्य में उद्देश्य या विधेय का भी विस्तार होता है। उदाहरण के लिए–

  • मोहन ने माखन चुराया है।       (सामान्य उद्देश्य)
  • नंद के पुत्र मोहन ने माखन चुराया है।     (उद्देश्य का विस्तार)
  • राम ने रावण को मारा।           ( सामान्य विधेय)
  • राम ने लंकापति, प्रतापी दुष्ट रावण को मारा।      (विद्येय का विस्तार)

२. संयुक्त वाक्य:

‘संयुक्त’ का अर्थ होता है जुड़ा हुआ ।अर्थात जिस वाक्य में दो या दो से अधिक सरल वाक्य फर्श पर जुड़े हूं तथा दोनों ही वाक्य प्रधान, हो उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं ।परंतु यहां ध्यातव्य है कि यह सभी सरल वाक्य संयुक्त वाक्य के उपवाक्य कहलाते हैं।

उदाहरण के लिए–

राम घर गया, खाना खाया और फिर सो गया।

यहां 3 सरल वाक्य को मिलाकर एक संयुक्त वाक्य बना है ,जिसमें तीन प्रधान उपवाक्य हैं, जैसे-

  • (अ) राम घर गया।
  • (आ) राम ने खाना खाया।
  • (इ) राम सो गया

संयुक्त वाक्य के तीनों उपवाक्य परस्पर जुड़े हैं तथा उनका अपना अलग महत्व है ।संयुक्त वाक्य में उप वाक्यों को जोड़ने वाले मुख्य चार प्रकार के संयोजक अवयव होते हैं और उन्हीं के आधार पर संयुक्त वाक्य को निम्नलिखित आरोप भागों में बांटा जा सकता है–

  • (अ) संयोजक संयुक्त वाक्य
  • (आ) विभाजक संयुक्त वाक्य
  • (इ) विकल्प सूचक संयुक्त वाक्य
  • (ई) परिणाम बोधक संयुक्त वाक्य

(अ) संयोजक संयुक्त वाक्य- ऐसे संयुक्त वाक्य में सभी उप वाक्यों में परस्पर अथवा सहयोग की स्थिति होती है और वे एक ही दिशा में अग्रसर होते हैं। ऐसे संयुक्त वाक्यों में सभी उपवाक्य प्रायः’ और ‘तथा ‘व’ ‘एवं ‘आदि संयोजक अवयवो से जुड़े होते हैं; जैसे-

मोहन ने पुस्तके उठाई, सीता ने पेन उठाया और सोहन ने कॉपी बैग में रखी।

(आ) विभाजक संयुक्त वाक्य: जब किसी संयुक्त वाक्य के उपवाक्य परस्पर विरोध मूलक स्थिति या मन :स्थिति को दर्शाते हैं, तब उन्हें विभाजक संयुक्त वाक्य कहते हैं ।ऐसे संयुक्त वाक्य में प्रायः ‘पर’ ‘परंतु’ ‘लेकिन ‘आदि विरोधमूलक अवयवों का प्रयोग होता है ,जिससे उपवाक्य परस्पर संयुक्त बने रहते हैं; जैसे–

सोहन चालक तो है परंतु वह बेईमान नहीं है।

लोग मंदिरों में तो दूध मिठाई चढ़ाते हैं पर गरीबों को एक रोटी नहीं दे सकते।

(आ) विकल्प सूचक संयुक्त वाक्य: जब किसी संयुक्त वाक्य के उपवाक्यो में परस्पर विकल्प की स्थिति दर्शाई गई हो, वहां विकल्प सूचक संयुक्त वाक्य  होता है। दूसरे शब्दों में ,ऐसे वाक्य में किसी एक ही उपवाक्य को पूरा करने का बोध होता है। ऐसे उपवाक्य ‘या’ ‘वा ‘अथवा’ नहीं तो आदि अवयवों से परस्पर जुड़े रहते हैं ;जैसे-

तुम अब पढ़ाई करो या फिर किसी काम की तलाश करो।

तुम चोर भी हो सकते हो  अथवा पुलिस वाले भी हो सकते हो।

(ई) परिणाम बोधक संयुक्त वाक्य-जब किसी संयुक्त वाक्य में प्रयुक्त उपवाक्य परस्पर एक दूसरे का फल अथवा परिणाम का संबंध दर्शाए वहां परिणाम बोधक संयुक्त वाक्य होता है ।ऐसे उपवाक्य प्रायः ‘अतः’ ‘इसलिए’ आदि अव्ययो से परस्पर जुड़े रहते हैं। उदाहरण के लिए–

मेरा भाई आया हुआ है इसलिए मैं तुमसे मिल ना सका।

मैं इस समय गुस्से में हूं अतः आप यहां से चले जाएं।

३. मिश्रित वाक्य:

इसे ‘जटिल वाक्य ‘भी कहा जाता है ।जब किसी वाक्य में एक उपवाक्य प्रधान हो तथा शेष सभी उपवाक्य उस पर आश्रित हो, तब उसे मिश्रित वाक्य कहते हैं। यहां ध्यातव्य है कि सभी मिश्रित वाक्य में प्रधान व आश्रित उपवाक्य वस्तुतः सरल वाक्य के रूप में ही होते हैं ,परंतु अनावश्यक विस्तार से बचने के लिए और भावों को अधिक स्पष्टता के साथ प्रकट करने के लिए मिश्रित वाक्य की रचना की जाती है ।वही व्यक्ति लंबे लंबे मिश्रित वाक्यों का प्रयोग कर सकता है जिसका भाषा पर पूरा अधिकार हो और उस भाषा के व्याकरण के नियमों का ज्ञाता हो। विशेषकर साहित्यकारों; यथा आचार्य रामचंद्र शुक्ल, जयशंकर प्रसाद आदि की रचनाओं में लंबे मिश्रित वाक्यों का सुंदर प्रयोग हुआ है। अतः कहा जा सकता है कि जब दो या दो से अधिक सरल वाक्य परस्पर मिलकर ऐसा वाक्य बनाएं जिसमें 1 प्रधान उपवाक्य बने तथा शेष वाक्य आश्रित उपवाक्य बने तब वहां मिश्रित वाक्य होता है। यथा–

  • क– शिकारी जंगल में पहुंचा।
  • ख– तभी उसे अपनी और एक बाघ आता दिखाई दिया।
  • ग– उस बाघ ने अपने कान उठा रखे थे।
  • घ– वह बहुत चौकन्ना था।

उपर्युक्त चारो और सरल वाक्य को मिलाकर एक मिश्रित वाक्य बनाया जा सकता है–

शिकारी जंगल में पहुंचा ही था कि उसे अपनी ओर आता हुआ एक चौकन्ना बाघ दिखाई दिया जिसने अपने कान उठा रखे थे।”

यहां “शिकारी जंगल में पहुंचा ही था “प्रधान उपवाक्य है तथा शेष दो उस पर आश्रित उपवाक्य हैं।

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